गाजीपुर (उत्तर प्रदेश): गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन के अनुसार, गाजीपुर में गंगा का जलस्तर 63.370 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि नदी का खतरे का निशान 63.105 मीटर है। जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों और कृषि क्षेत्रों पर बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सेवराई और जमानिया तहसील के कई गांव शामिल हैं। यहां बाढ़ का पानी खेतों और संपर्क मार्गों तक पहुंच चुका है। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हो गई हैं, जिससे ग्रामीणों के आवागमन में कठिनाइयां बढ़ गई हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने मां कामाख्या धाम जाने वाली बाईपास सड़क पर बैरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया है। इसके अलावा गंगा घाटों पर भी सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेड लगाए गए हैं ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित बाढ़ चौकियों के माध्यम से प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। लाउडस्पीकर के जरिए ग्रामीणों को सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रशासन ने करीब 12 हजार ग्रामीणों को टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा है, ताकि बाढ़ से संबंधित जरूरी सूचनाएं समय पर पहुंचाई जा सकें। साथ ही जिले में बाढ़ चौकियां, राहत आश्रय स्थल और कंट्रोल रूम पूरी तरह सक्रिय कर दिए गए हैं। एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर स्थिति पर नजर रख रही हैं।
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों से प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने, अनावश्यक रूप से नदी के किनारे न जाने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।
रिपोर्टर: रिज़वान अंसारी
स्थान: गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
