फतेहपुर। सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार ने गबन के एक मामले को सुना और बचाव पक्ष के विद्वान अधिवक्ता की दलील पर आरोपी सब इन्स्पेक्टर को सशर्त अग्रिम जमानत मंजूर कर दी।
विद्वान अधिवक्ता मो. सोहराब खान एडवोकेट ने बताया कि आरोपी सब इन्स्पेक्टर प्रकाश वीर सिंह पु० स्व० इन्द्रजीत सिंह के विरुद्ध वादी मुकदमा ने दिनांक 19.12.2024 को सन्विधाता थाने पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सेनानायक 12वीं वाहिनी पीएसी फतेहपुर के पत्रांक संख्या जे-14/2024 दिनांक 18.12.2024 के माध्यम से उपनिरीक्षक (लिपिक) प्रकाश वीर सिंह के 12वीं वाहिनी पीएसी फतेहपुर में नियुक्ति के दौरान रिकार्ड कीपर लिपिक पद पर रहते हुए दिलीप पुस्तक भण्डार देवीगंज फतेहपुर के बिल कुल धनराशि 16020 रुपये की प्रविष्टि स्टाक रजिस्टर में नहीं की गई। प्रारम्भिक जाँच में दोषी पाये जाने पर दिनांक 5.10.2024 एवं 18.11.2024 को पत्र के माध्यम से उक्त शासकीय क्षति की धनराशि राजकीय कोष में जमा कराये जाने को नोटिस निर्गत की गई थी। लेकिन नोटिस प्राप्त करने के बाद भी धनराशि जमा नहीं कराई गई।
विद्वान अधिवक्ता मो. सोहराब खान ने आगे बताया कि आरोपी निर्दोष है। त्रुटियों के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया। कुछ सामान का अंकन स्टाक रजिस्टर में न होना मानवीय भूल हो सकती है। विवेचना में नोटिस प्राप्त करने का उल्लेख नहीं है। कहा कि आरोपी सब इन्स्पेक्टर ने स्थानान्तरण के बाद दिनांक 2.3.2024 को उपनिरीक्षक (लिपिक) किस चार्ज हस्तान्तरण कराया था। उस समय भी स्टोर्स की कोई कमी अंकित नहीं की गई थी। इसके बाद भी विभागीय कार्रवाई के जरिये उक्त धनराशि वसूल की जा चुकी है। आरोपी के विरुद्ध गबन का कोई तथ्य नहीं बनता है, फिर भी पुलिस जाबर गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है जबकि आरोपी दरोगा का कोई अपराध नहीं है। सुधीर कुमार की अदालत ने मामले को सुनने के बाद आरोपी उपनिरीक्षक को सशर्त जमानत मंजूर कर दी।
रिपोर्ट: रिजवान उददीन
स्थान: फतेहपुर, उत्तर प्रदेश
