बरेली, उत्तर प्रदेश। बरेली के स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाए जाने और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच के सिलसिले में दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान दिव्यांग प्रमाणपत्र शाखा से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटर कुलदीप को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच कथित रूप से पैसे लेकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी किए जाने के आरोपों से जुड़ी है। इसी मामले में क्राइम ब्रांच की टीम ने संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की तथा कंप्यूटर ऑपरेटर से विस्तृत पूछताछ की।
सूत्रों के मुताबिक, जांच अब केवल एक कर्मचारी तक सीमित नहीं है। दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वहीं, बरेली से भोजीपुरा स्थानांतरित किए गए एक कर्मचारी का नाम भी जांच के दायरे में होने की चर्चा है।
मामले में यह भी संभावना जताई जा रही है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह से भी पूछताछ की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी भी एजेंसी या स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दिव्यांग प्रमाणपत्र सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यदि जांच में फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने या रिश्वत लेने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार का गंभीर मामला होगा, बल्कि वास्तविक दिव्यांग लाभार्थियों के अधिकारों के साथ भी धोखाधड़ी माना जाएगा।
फिलहाल दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम बरेली में मौजूद है और मामले की गहन जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: यह समाचार प्रारंभिक जांच और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
रिपोर्ट: 4TV News
स्थान: बरेली, उत्तर प्रदेश
