Did Saudi Pressure Force US Retreat? Big Revelation Over Halt of ‘Project Freedom’ Amid Iran Tensions
Saudi Arabia और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अचानक रोकने को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब ने अमेरिका पर दबाव बनाते हुए साफ कर दिया था कि ईरान के खिलाफ किसी सैन्य अभियान के लिए उसके एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी दबाव के बाद Donald Trump प्रशासन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में शुरू किए गए ऑपरेशन ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को कुछ ही दिनों में रोकने का फैसला लिया।
क्या था ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
अमेरिका ने 3 अप्रैल को Strait of Hormuz में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया था। इसका उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना और समुद्री मार्ग को फिर से सामान्य बनाना था। अमेरिकी नौसेना की निगरानी में यह अभियान शुरू हुआ, लेकिन ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कड़ा विरोध किया।
Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई जारी रखी तो जवाबी कदम उठाए जाएंगे। इसी दौरान ईरान ने यूएई से जुड़े कई ठिकानों पर हमलों के आरोपों के बीच क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया।
सऊदी ने दिखाई नाराजगी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति बनने पर सबसे बड़ा नुकसान अरब देशों को उठाना पड़ेगा। इसी कारण रियाद ने अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि Mohammed bin Salman ने इस पूरे मामले में सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया और अमेरिका से तनाव कम करने की अपील की।
ट्रंप के बदले रुख पर चर्चा
ईरान संकट को लेकर ट्रंप प्रशासन के लगातार बदलते रुख पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहले अमेरिका ने ईरान पर कड़ा सैन्य दबाव बनाया, फिर युद्धविराम और बातचीत के संकेत दिए, और बाद में ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को अचानक रोक दिया।
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि यह फैसला ईरान के साथ बातचीत की संभावना को देखते हुए लिया गया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब के दबाव ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति और तेल बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
