Claim of 3000 Ukrainians Entering India is False, Government Clarifies Truth
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस दावे को केंद्र सरकार ने खारिज कर दिया है, जिसमें कहा जा रहा था कि 3 हजार से अधिक यूक्रेनी नागरिक भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में छिपकर विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह दावा पूरी तरह भ्रामक और गलत है। गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि ऐसी अपुष्ट जानकारी को आगे साझा न करें।
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ यूजर्स ने खुफिया एजेंसियों का हवाला देते हुए दावा किया था कि बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिक पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय हैं और उन्हें अमेरिकी भाड़े के सैनिकों का समर्थन मिल रहा है। यह भी कहा गया कि वे आतंकियों को सस्ते ड्रोन उपलब्ध करा रहे हैं।
हालांकि, जांच में सामने आया कि मामला केवल कुछ गिरफ्तार विदेशी नागरिकों से जुड़ा है। 13 मार्च को मिजोरम में अवैध रूप से प्रवेश करने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के अनुसार, इन आरोपियों पर म्यांमार में सशस्त्र विद्रोही गुटों को ट्रेनिंग देने और ड्रोन व जैमिंग उपकरण उपलब्ध कराने का आरोप है। पूछताछ में उन्होंने म्यांमार में कई बार ट्रेनिंग देने की बात स्वीकार की है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने कहा कि यह एक कानूनी मामला है और संबंधित एजेंसियां इसकी जांच कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन ने अपने नागरिकों के लिए कांसुलर एक्सेस का अनुरोध किया है, जिस पर कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा।
वहीं, यूक्रेन ने भारत में किसी भी तरह की आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
