Iran War: Strait of Hormuz Closed, Ships Bound for West Asia Stuck at Indian Ports; Government Offers Relief
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब समुद्री व्यापार पर भी पड़ने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण पश्चिम एशिया की ओर जाने वाले कई जहाज भारतीय बंदरगाहों पर फंस गए हैं। इनमें कुछ जहाज ऐसे हैं जो बीच रास्ते से वापस लौट आए, जबकि कई जहाज युद्ध की स्थिति के कारण अपनी यात्रा शुरू ही नहीं कर सके।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार के शिपिंग मंत्रालय ने बंदरगाह अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि फंसे हुए भारतीय मालवाहक जहाजों को राहत दी जाए। मंत्रालय ने कहा है कि समुद्री यातायात बाधित होने से शिप ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, इसलिए उनके द्वारा मांगी गई रियायतों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाए।
सरकार के इस फैसले के बाद पश्चिम एशिया की ओर जाने के इंतजार में खड़े जहाजों को शुल्कों में राहत दी जा रही है। इसमें रीफर प्लगिंग फीस में कटौती और स्टोरेज रेंट में रियायत शामिल है। रीफर प्लगिंग फीस वह शुल्क है जो जहाजों पर रखे रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों को बिजली सप्लाई देने के बदले लिया जाता है।
सरकार ने यह भी अनुमति दी है कि खाड़ी देशों की ओर रवाना होने वाले जहाज उन भारतीय बंदरगाहों पर भी डॉक कर सकेंगे, जहां से उन्होंने अपनी यात्रा शुरू नहीं की थी। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार फिलहाल भारतीय बंदरगाहों पर 11 जहाज फारस की खाड़ी जाने के इंतजार में खड़े हैं, जबकि लगभग 35 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर रुके हुए हैं।
मंत्रालय ने पश्चिम एशिया की ओर जाने वाले जहाजों के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी किया है। इसके तहत बंदरगाहों पर स्थिति के अनुसार शुल्कों में छूट देने और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया जा रहा है।
इसके अलावा जहाजों को सहायता देने के लिए सभी बंदरगाहों पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। जहाजों को राहत देने के लिए कंटेनरों को बिना एंट्री बिल भरे समुद्री टर्मिनल पर अनलोड करने की अनुमति भी दी गई है। हालांकि यह सुविधा जरूरी दस्तावेजों की जांच के बाद ही प्रदान की जा रही है।
