FIR Filed Against Jail Superintendent and Jailer Over Gangster Ravi Kana’s Unauthorized Release
बांदा।उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में नोएडा के कुख्यात स्क्रैप माफिया और गैंगस्टर रवि काना की जेल से अनधिकृत रिहाई का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने जांच तेज कर दी है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जेल पुलिस चौकी प्रभारी अनुराग पांडे की तहरीर पर निलंबित जेलर विक्रम सिंह यादव, जेल अधीक्षक अनिल गौतम और कई बंदी रक्षकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच के लिए अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है।
रविवार को प्रयागराज जोन के डीआईजी ने बांदा मंडल कारागार का निरीक्षण कर जेल अधीक्षक, बंदियों और जेल कर्मियों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान सीसीटीवी फुटेज की भी गहन जांच की गई। जांच के निष्कर्षों के आधार पर मंगलवार को कोतवाली नगर थाना में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि ग्रेटर नोएडा निवासी गैंगस्टर रविंद्र नागर उर्फ रवि काना को अगस्त 2024 में बांदा मंडल कारागार में निरुद्ध किया गया था। आरोप है कि गुरुवार शाम को जेल प्रशासन ने उसे बिना किसी लिखित न्यायिक आदेश और अदालत को सूचना दिए बिना रिहा कर दिया।
इस मामले पर गौतमबुद्धनगर की सीजेएम अदालत ने जेल अधीक्षक से स्पष्टीकरण तलब किया है। वहीं, डीजी जेल के आदेश पर जेलर विक्रम सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जेल अधीक्षक के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश जारी किए गए हैं।
इसके अलावा पुलिस की पांच सदस्यीय एसओजी टीम ने करीब चार घंटे तक जेल परिसर में जांच की। इस दौरान पखवाड़े भर पुराने सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की गई। करीब एक दर्जन बंदियों और आधा दर्जन से अधिक जेल कर्मियों से पूछताछ भी की गई।
मुकदमा दर्ज होने के बाद जेल अधीक्षक, निलंबित जेलर और अन्य जेल कर्मियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गहन जांच के बाद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
