Book fair organised at Mahoba Surya Mahotsav
महोबा के सूर्य महोत्सव के तीसरे दिन ऐतिहासिक मोदी ग्राउंड ज्ञान की रोशनी से सराबोर रहा। पहली बार आयोजित पुस्तक मेले में छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ी, जहाँ प्रसिद्ध लेखक नीलोत्पल मृणाल ने युवाओं से सीधा संवाद किया। वहीं, बुंदेलखंडी व्यंजनों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने जिले की सांस्कृतिक विरासत को देश भर में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है।
महोबा के ऐतिहासिक मोदी ग्राउंड में चल रहे सूर्य महोत्सव का तीसरा दिन शिक्षा और संस्कृति के नाम रहा। जनपद में पहली बार आयोजित पुस्तक मेले ने वह कर दिखाया जिसकी उम्मीद कम ही थी। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के करीब 20 स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने पुस्तक मेले में पहुंचे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने जहाँ अपनी पसंद की किताबें खरीदीं, वहीं बच्चों में किताबों के प्रति गजब की उत्सुकता देखी गई।
सांस्कृतिक मंच पर आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल। दिल्ली से आए इस युवा आइकन को देखने और सुनने के लिए छात्र-छात्राओं का हुजूम उमड़ पड़ा। नीलोत्पल ने युवाओं से सीधा संवाद कर उन्हें जीवन में संघर्ष और प्रगति की प्रेरणा दी। युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने और उनके अनुभवों को साझा करने की होड़ मची रही।
महोबा की पहचान सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि यहाँ का स्वाद और शिल्प भी है। महोत्सव में उद्यमी दिवस के अवसर पर बुंदेलखंडी व्यंजनों की महक चारों ओर फैली रही। 11 प्रतिभागियों ने चने का साग, माड़े, कढ़ी और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया। वहीं, एक जनपद-एक उत्पाद के तहत गौरहारी और कुलपहाड़ से आए शिल्पकारों ने पत्थर और धातु शिल्प की अद्भुत कलाकृतियाँ पेश कीं। सूर्य थीम पर आधारित इन उत्पादों को देखकर सैलानी दंग रह गए।
जिलाधिकारी गजल भरद्वाज ने इस आयोजन को महोबा की नई पहचान से जोड़ते हुए कहा कि पुस्तक मेले और शिल्प प्रदर्शनी का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच देना है। उन्होंने खुशी जताई कि बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ रही है। प्रशासन की इस पहल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महोबा का गौरा पत्थर शिल्प और यहाँ के व्यंजन देश के कोने-कोने तक पहुँच सकेंगे।
