बागपत (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल ने गोवंश संरक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। बागपत में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “उत्तर प्रदेश की धरती से 5 किलो गोवंश का भी निर्यात नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर कानून का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
महेश कुमार शुक्ल ने कहा कि गोवंश की देखभाल केवल गौशालाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज को भी इसमें अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। उनके अनुसार, गोवंश का वास्तविक स्थान गौशालाएं नहीं बल्कि लोगों के बीच है, इसलिए समाज को उन्हें अपने संरक्षण में रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 16 लाख गोवंश लोगों द्वारा छोड़े गए थे, जिनमें से 1 लाख 84 हजार गोवंश किसानों को वापस सौंपे जा चुके हैं। उनका कहना था कि सरकार किसानों को गोवंश पालने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पहले की सरकारों में इस प्रकार की सहायता उपलब्ध नहीं थी, जबकि वर्तमान सरकार गोवंश संरक्षण के लिए आर्थिक सहयोग भी दे रही है।
गोवंश तस्करी पर सख्त रुख अपनाने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गोवंश से जुड़े कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है और अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।
महेश कुमार शुक्ल के इस बयान के बाद प्रदेश में गोवंश संरक्षण, किसानों की भूमिका, गौशालाओं की व्यवस्था और सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्टर: चंदन सिंह
स्थान: बागपत, उत्तर प्रदेश
