System failure! Hungry sailors left drenched in rain, administration missing.
जांजगीर-चांपा से इस वक्त की सबसे बड़ी और शर्मनाक तस्वीर सामने आ रही है… जहां बे-मौसम बरसात ने सिर्फ मौसम ही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता की भी पोल खोल कर रख दी है। नगर पंचायत शिवरीनारायण में गरीब नाविक अपने हक के लिए सड़क पर हैं, लेकिन जिम्मेदार अफसर? गायब हैं!
कल से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे ये प्रदर्शनकारी आज भी भूख हड़ताल पर डटे रहे, लेकिन हैरानी की बात ये है कि प्रशासन का एक भी नुमाइंदा उनकी सुध लेने तक नहीं पहुंचा, तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश के बीच ये लोग खुले आसमान के नीचे बैठे रहे, भीगते रहे, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा।
ये तस्वीर सिर्फ एक प्रदर्शन की नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी और बेरहमी की गवाही दे रही है, 55 साल का एक बुजुर्ग, जिस उम्र में उसे सहारे की जरूरत है, वो आज न्याय की आस में भूखा बैठा है, भीग रहा है, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं….. क्या यही है सुशासन? क्या गरीबों की आवाज अब इतनी कमजोर हो चुकी है कि सत्ता के कानों तक नहीं पहुंचती? जांजगीर-चांपा का प्रशासन आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही सिस्टम की नींद खुलेगी?
नगर पंचायत शिवरीनारायण में कानून व्यवस्था की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि इंसानियत भी अब सवालों के घेरे में है, प्रदर्शनकारी लगातार गुहार लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
एंकर क्लोज:– अगर अब भी प्रशासन नहीं जागा… तो ये सिर्फ लापरवाही नहीं… बल्कि गरीबों के हक की खुली हत्या मानी जाएगी। सवाल सीधा है– आखिर कब खुलेगी प्रशासन की आंखें और कब मिलेगा इन नाविकों को उनका हक?
