Petrol crisis in Pakistan! Shahbaz in trouble
पाकिस्तान। में पेट्रोल संकट ने हालात बिगाड़ दिए हैं। Pakistan के कई बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर अफरातफरी का माहौल है। Karachi में पेट्रोल पंपों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जबकि Islamabad में लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं और Lahore में हालात बेकाबू होते दिखाई दे रहे हैं। पेट्रोल और डीज़ल के लिए लोग घंटों-घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। इस संकट के बीच पाकिस्तान की सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। लोग कह रहे हैं कि बड़ी-बड़ी बातें करने वाला पाकिस्तान दो दिन में ही अपनी असली हालत में आ गया है।
बताया जा रहा है कि हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को एक-एक लीटर तेल के लिए 8 से 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। पेट्रोल पंपों के बाहर सिर्फ लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। इस संकट के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ अफगान सीमा पर Tehrik-i-Taliban Pakistan के साथ तनाव बढ़ा हुआ है तो दूसरी तरफ मिडिल ईस्ट में Iran और Israel के बीच चल रहे संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर पाकिस्तान की तेल सप्लाई पर पड़ा है।
हालात बिगड़ते देख पाकिस्तान सरकार ने पहले लोगों को वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी। जब इससे भी हालात नहीं संभले तो कई जगह स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया। लेकिन इसके बाद सरकार ने जो कदम उठाया उसने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी। Shehbaz Sharif की सरकार ने अचानक पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया। कीमतें बढ़ने की खबर मिलते ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी और हालात और ज्यादा बिगड़ गए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में तेल का भंडार भी बहुत सीमित बचा है। दावा किया जा रहा है कि देश में एलपीजी का सिर्फ लगभग 15 दिन का स्टॉक बचा है जबकि कच्चे तेल का भंडार करीब 25 दिन का ही रह गया है। ऐसे में लोगों के बीच घबराहट बढ़ती जा रही है।
इस बीच सरकार ने आधी रात को पेट्रोलियम की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी। कीमतों में करीब 55 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया, जिसके बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 321 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत करीब 355 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई।
हालांकि पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है और देश में पर्याप्त तेल मौजूद है। लेकिन दूसरी तरफ पेट्रोल पंप डीलर्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों से जुड़े लोगों का कहना है कि असल स्थिति बिल्कुल अलग है और कई जगह पेट्रोल पंपों को पर्याप्त सप्लाई ही नहीं मिल रही है।
संकट से निपटने में पाकिस्तान सरकार के हाथ-पैर फूलते दिखाई दे रहे हैं। कभी वर्क फ्रॉम होम की अपील की जाती है तो कभी स्कूल बंद करने का फैसला लिया जाता है। लेकिन आम लोगों का कहना है कि सरकार के पास इस संकट से निपटने की कोई ठोस योजना नजर नहीं आ रही।
देश के कई शहरों में तो पेट्रोल पंपों पर ताले तक लटक गए हैं। Multan और Muzaffargarh जैसे शहरों में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। लोग सरकार से पूछ रहे हैं कि आखिर इस संकट में सरकार कहां है।
हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोगों को डर है कि सरकार कहीं गाड़ियों के इस्तेमाल पर ही पाबंदी न लगा दे। इस बीच खबर यह भी है कि अगर किसी ने घर में तेल का स्टॉक जमा करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पाकिस्तान के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Qatar ने भी पाकिस्तान को एलएनजी सप्लाई को लेकर सख्त रुख अपना लिया है, जिससे ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
दरअसल दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई Strait of Hormuz के रास्ते होती है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव की वजह से इस समुद्री रास्ते पर असर पड़ता है तो पाकिस्तान जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
यही वजह है कि पाकिस्तान में बढ़ते पेट्रोल संकट को लेकर लोगों में बेचैनी बढ़ती जा रही है और सरकार पर सवालों की बौछार हो रही है।
