60 Fish Farmers from Rohtas Visit Nalanda Hatchery, Learn Modern Fish Farming Techniques
नालंदा। मत्स्य विकास पदाधिकारी रोहतास चितरंजन तिवारी के नेतृत्व में बुधवार को 60 मत्स्य पालक किसानों का दल भ्रमण-दर्शन योजना के तहत नालंदा जिले के मोहनपुर मत्स्य हैचरी पहुंचा। यहां किसानों ने मत्स्य पालन, मत्स्य बीज उत्पादन, तालाब एवं नर्सरी की तैयारी, हैचरी प्रबंधन तथा कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
मोहनपुर मत्स्य हैचरी के संचालक सह बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहयोग समिति लिमिटेड के निदेशक शिवनंदन प्रसाद उर्फ शिव जी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार कृषि में पौधों की बेहतर वृद्धि के लिए जैविक एवं रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग किया जाता है, उसी प्रकार मत्स्य उत्पादन के लिए तालाबों में समय-समय पर उचित मात्रा में खाद का प्रयोग आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन के लिए तालाब के पानी का पीएच स्तर लगभग 7.5 होना चाहिए। यदि पानी की गुणवत्ता सही नहीं होगी तो मछलियों की वृद्धि प्रभावित होती है। पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम चुना का घोल बनाकर पूरे तालाब में छिड़काव करने की सलाह दी गई।
किसानों को बताया गया कि अधिक उत्पादन के लिए कृत्रिम भोजन के रूप में सरसों एवं बादाम की खल्ली, गेहूं का चोकर, चावल का ब्रान तथा मछलियों के लिए तैयार दाना का उपयोग किया जा सकता है। मत्स्य बीज के वजन का लगभग 5 प्रतिशत आहार देने से मछलियों की अच्छी वृद्धि संभव है।
शिवनंदन प्रसाद ने कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए तो एक एकड़ तालाब से 2,000 से 2,500 किलोग्राम तक मछली उत्पादन किया जा सकता है।
भ्रमण के दौरान महिला एवं पुरुष मत्स्य पालकों ने हैचरी का बारीकी से निरीक्षण किया और तकनीकी जानकारी हासिल की। इस अवसर पर राकेश भारती, पूजा कुमारी, नीलम कुमारी, सुधीर कुमार, नीतू कुमारी, मनोज कुमार, अजय कुमार, कुणाल कुमार, अयोध्या प्रसाद, नीतीश कुमार, संस्कार कुमार, सोनाली वर्मा सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।
