मिडिल ईस्ट में जंग का माहौल लगातार भड़कता जा रहा है। Iran के खिलाफ Israel और United States की तरफ से जबरदस्त सैन्य कार्रवाई जारी है। आसमान से लेकर समंदर तक मिसाइलों की बौछार हो रही है।
ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, रणनीतिक ठिकानों को तबाह किया जा रहा है और शीर्ष सैन्य नेताओं को टारगेट किया जा रहा है। हालांकि दूसरी तरफ ईरान भी चुप नहीं बैठा है और वह लगातार अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब दे रहा है, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।इसी बीच अमेरिका ने एक बड़ा दावा करते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth के मुताबिक ईरान के एक कमांडर ने Donald Trump की हत्या की साजिश रची थी और वह साजिश ट्रंप की गर्दन तक पहुंच चुकी थी। लेकिन इससे पहले कि ईरान अपने मकसद में कामयाब हो पाता, अमेरिकी सेना ने उस कमांडर को मार गिराया।
अमेरिकी रक्षा मंत्री के मुताबिक ईरान पर किए गए हमले के दौरान उस कमांडर को ढेर कर दिया गया जिसने ट्रंप की हत्या की योजना बनाई थी। मारे गए कमांडर की पहचान दाऊद अली जादेह के रूप में हुई है, जो ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC की कुर्द इकाई का प्रमुख कमांडर था।ईरान ने भी जादेह की मौत की पुष्टि कर दी है।
बताया जा रहा है कि उसकी मौत इजरायली सेना यानी Israel Defense Forces के एक स्ट्राइक ऑपरेशन में हुई। IRGC के भीतर कुर्द्स फोर्स का काम विदेशों में गुप्त सैन्य और खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देना होता है।
इसलिए जादेह की मौत को ईरान के बाहरी सैन्य अभियानों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।दरअसल कुर्द्स फोर्स सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के लिए काम करती है। इस फोर्स के कमांडर सिर्फ सैन्य रणनीतिकार ही नहीं होते बल्कि वे ईरान के कूटनीतिक और वैचारिक प्रभाव को दूसरे देशों तक फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जादेह की मौत को ईरान के लिए एक बड़ा नुकसान बताया जा रहा है।इस पूरे मामले के बीच एक और चौंकाने वाला खुलासा अमेरिका की अदालत में हुआ।
पाकिस्तानी नागरिक Asif Merchant ने दावा किया कि ईरान के जासूसों ने Donald Trump की हत्या की सुपारी दी थी। उसके निशाने पर ट्रंप के साथ-साथ Joe Biden और Nikki Haley भी थे।
आसिफ मर्चेंट इस समय अमेरिका में जेल में बंद है। उस पर हत्या की साजिश रचने और इसके लिए पैसे लेने का आरोप है। उसे अगस्त 2024 में गिरफ्तार किया गया था।वैसे यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाया गया हो। साल 2024 में भी उन पर एक जानलेवा हमला हुआ था। यह हमला Pennsylvania में उस समय हुआ जब ट्रंप एक खुले मैदान में चुनावी रैली कर रहे थे। तभी एक हमलावर ने पास की एक इमारत की छत से गोलीबारी शुरू कर दी।इस हमले में एक गोली ट्रंप के कान के पास लगी थी लेकिन उन्हें गंभीर चोट नहीं आई।
हमलावर की पहचान 20 साल के युवक Thomas Matthew Crooks के रूप में हुई थी। उसने AR-15 rifle से करीब आठ गोलियां चलाई थीं। हालांकि फायरिंग के तुरंत बाद सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने हमलावर को मार गिराया था।डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान की तरफ से उन्हें मारने की दो बार कोशिश की गई लेकिन हर बार वे बच गए। वहीं अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक Islamic Revolutionary Guard Corps ट्रंप की हत्या करना चाहता है क्योंकि वह जनरल Qasem Soleimani की मौत का बदला लेना चाहता है।दरअसल 3 जनवरी 2020 को Donald Trump के आदेश पर अमेरिकी सेना और Central Intelligence Agency ने मिलकर ईरान की विशेष सैन्य इकाई के प्रमुख जनरल कासिम सुलेमानी को मार गिराया था।
जनरल सुलेमानी इराक और सीरिया में आतंकी संगठन Islamic State के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाने के लिए जाने जाते थे। उनकी मौत के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए Baghdad में अमेरिकी दूतावास और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। 7 और 8 जनवरी 2020 को ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर करीब 22 मिसाइलें दागी थीं, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।
