Opposition Moves Motion Against Lok Sabha Speaker, Gaurav Gogoi Says ‘No Joy in It, But Necessary’
नई दिल्ली: Lok Sabha में मंगलवार को विपक्ष ने अध्यक्ष Om Birla को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के उपनेता Gaurav Gogoi ने कहा कि इस तरह का प्रस्ताव लाने में विपक्ष को कोई खुशी नहीं है, लेकिन सदन की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है।
प्रस्ताव पेश करने के समर्थन में 50 से अधिक सांसद खड़े हुए, जिसके बाद पीठासीन सभापति Jagadambika Pal ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी।
प्रस्ताव से पहले चर्चा के दौरान Asaduddin Owaisi ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जगदंबिका पाल की नियुक्ति खुद लोकसभा अध्यक्ष ने की है, इसलिए वे इस मामले में पीठासीन सभापति की भूमिका नहीं निभा सकते। कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने भी ओवैसी की इस आपत्ति का समर्थन किया।
केसी वेणुगोपाल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने अब तक लोकसभा उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया है, जिससे संवैधानिक शून्यता की स्थिति पैदा हो गई है। उनका कहना था कि सदन को किसी ऐसे सदस्य का चयन करना चाहिए जो निष्पक्ष रूप से कार्यवाही का संचालन कर सके। इस पर तृणमूल कांग्रेस के Saugata Roy ने भी सहमति जताई।
वहीं भाजपा सांसद Nishikant Dubey ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि आसन पर बैठने वाले पीठासीन सभापति को अध्यक्ष के समान अधिकार प्राप्त होते हैं।
भाजपा नेता Ravi Shankar Prasad ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नियमों के तहत नियुक्त पीठासीन सभापति को सदन की कार्यवाही चलाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है।
संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने भी कहा कि जिस विषय पर आसन पहले ही फैसला दे चुका है, उस पर बार-बार व्यवस्था का प्रश्न उठाना उचित नहीं है। इस पर जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि लोकसभा अध्यक्ष का पद खाली नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता।
चर्चा के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब गौरव गोगोई ने कहा कि भविष्य में संसदीय रिकॉर्ड देखने पर यह सामने आएगा कि संसदीय कार्य मंत्री के रूप में किरेन रिजिजू ने विपक्ष को सबसे अधिक बाधित किया है। इस पर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने जवाब देते हुए कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि रिजिजू ने सबसे ज्यादा बाधा डाली है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतना गैर-जिम्मेदार विपक्ष पहले कभी नहीं देखा गया।
