Middle East Tensions Threaten Noida Exports, Shipping Costs May Surge by 60%
नोएडा/ग्रेटर नोएडा: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। वैश्विक अस्थिरता के चलते शिपिंग रूट बदल रहे हैं और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसका सीधा प्रभाव जिले से होने वाले लगभग 15 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर पड़ सकता है, जिसके संकेत मार्च से मिलने लगेंगे।
शिपिंग रूट में बदलाव, ट्रांजिट टाइम बढ़ेगा
हैंडलूम हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (हीवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीपी शर्मा के अनुसार, मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण जहाजों को पारंपरिक मार्गों की बजाय वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं। इससे माल को गंतव्य तक पहुंचने में करीब 15 दिन अतिरिक्त लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि यूरोप और स्पेन जैसे बाजारों के लिए जो कंटेनर पहले लगभग 4,200 डॉलर में भेजा जाता था, उसका खर्च बढ़कर 6,600 डॉलर तक पहुंच सकता है। फ्रेट दरों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित कर सकती है।
निर्यात का प्रमुख केंद्र है नोएडा
नोएडा को गारमेंट उद्योग के लिए ‘टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सिलेंस’ का दर्जा प्राप्त है। यहां से रेडीमेड गारमेंट्स, होम टेक्सटाइल, आभूषण, ऑटो पार्ट्स, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट, खिलौने और इलेक्ट्रिकल उपकरणों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में Samsung, OPPO और Vivo जैसी कंपनियों के उत्पाद भी यहां से निर्यात किए जाते हैं। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने से इन सभी उद्योगों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
बढ़ती लागत से पुराने ऑर्डर संकट में
टेक्सटाइल निर्यातक संजीव भसीन का कहना है कि मिडिल ईस्ट संकट का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से डाइंग, प्रिंटिंग और मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ेगी। सबसे बड़ी चुनौती उन ऑर्डर्स को लेकर है, जो पहले से तय दरों पर लिए जा चुके हैं। लागत बढ़ने से निर्यातकों को इन सौदों पर भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
साथ ही विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने में फिलहाल ‘रुको और देखो’ की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे उद्योगों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
रोजगार और विदेशी मुद्रा पर असर
गौतम बुद्ध नगर से बड़ी संख्या में इंजीनियर, डॉक्टर और कुशल कारीगर मध्य पूर्व देशों में कार्यरत हैं। क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने से उनके रोजगार पर भी खतरा मंडरा सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है।
राहत पैकेज की मांग
हैंडिक्राफ्ट उद्यमियों शोभा और अनिल अग्रवाल ने केंद्र और राज्य सरकार से विशेष राहत पैकेज, लॉजिस्टिक सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन देने की मांग की है। निर्यातकों का कहना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए सरकारी समर्थन आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे जोखिम प्रबंधन रणनीति अपनाएं और पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम कर नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश करें, ताकि मौजूदा संकट का प्रभाव कम किया जा सके।
