कहते हैं कि अगर मेहनत और लगन सच्ची हो तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है। इसी कहावत को सच कर दिखाया है रायबरेली जिले के खीरो ब्लॉक के चांदेमऊ गांव निवासी विमल कुमार ने।
मजदूर परिवार से आने वाले विमल कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 107वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव और जिले में खुशी की लहर है।विमल कुमार के पिता रामदेव मजदूरी करते हैं और परिवार का गुजारा बेहद साधारण परिस्थितियों में हुआ।
सीमित संसाधनों के बावजूद विमल ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया। उनकी सफलता से परिवार के साथ-साथ गांव के लोग भी बेहद गर्व महसूस कर रहे हैं।विमल कुमार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राथमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ाई की और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया और स्वअध्ययन के जरिए तैयारी करते रहे।कई बार असफलताओं का सामना करने के बावजूद विमल ने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने आखिरकार अपने पांचवें प्रयास में UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। उनकी इस उपलब्धि पर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं और पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है।
विमल कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, परिवार और शिक्षकों को दिया है। उनका कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता।विमल की इस सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है। गांव के लोगों का कहना है कि विमल की उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि संघर्ष और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है।
