एक तरफ Donald Trump ये दावा कर रहे हैं कि जंग में वो Iran को तबाह कर चुके हैं, लेकिन दूसरी तरफ एक ऐसा खुलासा सामने आया है जिसने इन दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल जंग के सिर्फ एक हफ्ते के भीतर ही अमेरिका को दूसरे देशों से मदद मांगनी पड़ रही है। ईरान ने जिस अंदाज़ में अमेरिका को जवाब दिया है उसके बाद अमेरिका के अंदर भी खलबली मच गई है। हथियारों के ज़खीरे तेजी से खर्च हो रहे हैं और मिसाइल अटैक अमेरिका की जेब पर भारी पड़ रहा है।
ऐसे हालात में अब अमेरिका को मदद की गुहार लगानी पड़ी है और हैरानी की बात ये है कि ये मदद मांगी गई है उस देश से जो खुद लंबे समय से युद्ध झेल रहा है, यानी Ukraine से। इस पूरे मामले का खुलासा खुद यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने किया है।
ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने खास तौर पर उनसे मदद मांगी है और उन्हें शाहेद ड्रोन के खिलाफ यूक्रेन के अनुभव और सहयोग की जरूरत है, जिसके बाद उन्होंने अमेरिका की मदद करने का फैसला किया है। ज़ेलेंस्की के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बड़ी-बड़ी ताकत की बातें करने वाला अमेरिका कुछ ही दिनों में मदद मांगने की स्थिति में आ गया।
इसकी सबसे बड़ी वजह है ईरान का खतरनाक हथियार Shahed-136। ईरान इस ड्रोन का इस्तेमाल बड़ी संख्या में कर रहा है। Shahed-136 एक कम लागत वाला कामिकाज़े ड्रोन है जिसे ज़मीनी ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए बनाया गया है और यह सैटेलाइट नेविगेशन के जरिए अपने लक्ष्य को भेदता है।
इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कम कीमत है क्योंकि एक शाहेद ड्रोन बनाने में करीब 18 लाख रुपये का खर्च आता है। कम कीमत होने की वजह से इन्हें बड़ी संख्या में एक साथ छोड़ा जा सकता है और यही रणनीति अमेरिका के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है।
अमेरिका की दिक्कत यह है कि करीब 18 लाख रुपये के एक ड्रोन को मार गिराने के लिए उसे लगभग 37 करोड़ रुपये की एयर डिफेंस मिसाइल दागनी पड़ती है, जिससे युद्ध का खर्च तेजी से बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि ईरान का यह छोटा लेकिन घातक हथियार अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसी समस्या से निपटने के लिए अब अमेरिका यूक्रेन की मदद लेना चाहता है क्योंकि यूक्रेन लंबे समय से Russia के साथ युद्ध में इन शाहेद ड्रोन का सामना कर रहा है।
रूस बड़ी संख्या में शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल करता है और उनसे निपटने के लिए यूक्रेन ने कई तकनीकें विकसित की हैं, जिनमें सस्ते इंटरसेप्टर ड्रोन शामिल हैं जो हवा में ही शाहेद ड्रोन को नष्ट कर देते हैं।
इसके अलावा मोबाइल एंटी-ड्रोन ग्रुप्स, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और छोटे हथियारों से ड्रोन को गिराने की तकनीक भी यूक्रेन ने विकसित की है। यही कारण है कि अब अमेरिका यूक्रेन के तकनीकी अनुभव और ऑपरेशनल एक्सपीरियंस का इस्तेमाल करके ईरान के इस ड्रोन का तोड़ तलाशना चाहता है।
