Iran Conflict Threatens Oil Supply: How Dependent Are India, China & Japan?
मध्य पूर्व में इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे अहम समुद्री मार्ग के बंद होने की आशंका ने एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मार्ग भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के लिए कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यदि यहां रुकावट आती है, तो एशिया की ऊर्जा जरूरतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ऐसे में सवाल है कि एशियाई देश इस जोखिम के प्रति कितने संवेदनशील हैं और उनके पास कितना रणनीतिक भंडार मौजूद है।
🇮🇳 भारत: आयात का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से
जनवरी में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 55 प्रतिशत हो गई, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। इसका मतलब है कि करीब 27.4 लाख बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति इसी क्षेत्र से हो रही है।
भारत के पास कंपनियों के स्टॉक और रणनीतिक भंडार मिलाकर लगभग 74 दिनों की घरेलू मांग के बराबर तेल उपलब्ध है।
एलएनजी के मामले में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा आयातक है और अपनी लगभग दो-तिहाई जरूरतें कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान से पूरी करता है।
🇨🇳 चीन: सबसे बड़ा आयातक, विशाल भंडार
चीन दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार भी है। उसके कुल आयात का लगभग आधा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है।
पिछले वर्ष चीन ने औसतन 13.8 लाख बैरल प्रतिदिन ईरानी तेल आयात किया, जो उसके समुद्री आयात का लगभग 13 प्रतिशत था।
विश्लेषकों के अनुसार, चीन के पास लगभग 90 करोड़ बैरल का रणनीतिक भंडार है, जो करीब तीन महीने के आयात के बराबर माना जाता है।
एलएनजी के क्षेत्र में भी चीन अग्रणी है और उसकी लगभग एक-तिहाई आपूर्ति मध्य पूर्व से आती है।
🇯🇵 जापान: 95% तेल जरूरतें मध्य पूर्व से
जापान अपनी लगभग 95 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी करता है, जिनमें से 70 प्रतिशत आपूर्ति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर गुजरती है।
जनवरी में जापान ने प्रतिदिन करीब 28 लाख बैरल तेल आयात किया, जिसमें सबसे अधिक सऊदी अरब से था।
जापान के पास 254 दिनों की खपत के बराबर आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है।
एलएनजी के मामले में वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। उसकी लगभग 40 प्रतिशत आपूर्ति ऑस्ट्रेलिया से और करीब 11 प्रतिशत मध्य पूर्व से आती है।
🇰🇷 दक्षिण कोरिया: आयात पर भारी निर्भरता
दक्षिण कोरिया अपनी लगभग 70 प्रतिशत कच्चे तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी करता है।
सरकारी और निजी भंडार मिलाकर उसके पास लगभग 208 दिनों की खपत के बराबर तेल भंडारण क्षमता है।
यदि मध्य पूर्व से आपूर्ति बाधित होती है, तो दक्षिण कोरिया वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
निष्कर्ष
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर एशिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। हालांकि भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के पास रणनीतिक भंडार मौजूद हैं, लेकिन यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में लंबे समय तक रुकावट आती है, तो तेल और गैस की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल संभव है, जिसका प्रभाव पूरे एशियाई क्षेत्र पर पड़ेगा।
