नई दिल्ली: यूरोप के 27 देश भारत के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। इन देशों की कोशिश सिर्फ कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारत के साथ व्यापार बढ़ाने, रक्षा सौदों को आगे ले जाने और टूरिज्म को भी बढ़ावा देना चाहते हैं। यह बदलाव केवल अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में आई खटास की वजह से नहीं है, बल्कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था यूरोप के लिए एक बड़ी जरूरत बन चुकी है। इसके पीछे कुल 5 बड़े कारण माने जा रहे हैं।
भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर फोकस
अमेरिका के साथ भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फिलहाल अटका हुआ है। ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही EU-India Free Trade Agreement को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं। भारत ने इस दिशा में पहल करते हुए 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इसके अगले दिन यानी 27 जनवरी को भारत-यूरोपीय संघ का 16वां शिखर सम्मेलन होने वाला है।
लंबे समय से अटके समझौते को पूरा करने की कोशिश
भारत और यूरोपीय संघ की प्राथमिकता है कि लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी की जाए। इस समझौते से दोनों पक्षों के बाजार खुलेंगे और व्यापार से जुड़ी रुकावटें कम होंगी।
अहम सेक्टरों में सप्लाई चेन मजबूत होगी
इस डील से क्लीन टेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और सेमीकंडक्टर्स जैसे अहम सेक्टरों में सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। इससे दोनों क्षेत्रों को आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है।
ग्लोबल सप्लाई चेन और जियोपॉलिटिकल मुद्दों पर चर्चा
भारत और यूरोप के बीच ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होगी। इन विषयों पर सहयोग दोनों के लिए जरूरी माना जा रहा है।
सुरक्षा और साइबर डिफेंस में बढ़ेगा सहयोग
इस समझौते से समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही सूचना सुरक्षा से जुड़े समझौतों पर भी चर्चा शुरू होने की संभावना है।
लोगों की आवाजाही आसान करने की तैयारी
भारत और यूरोपीय संघ मोबिलिटी पर सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचे पर समझौता करने की योजना बना रहे हैं। इससे स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स, सीजनल वर्कर्स और हाई स्किल्ड प्रोफेशनल्स की आवाजाही आसान होगी। साथ ही रिसर्च और इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
यूरोप को क्यों है भारत की ज्यादा जरूरत
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की प्रमुख प्रतिनिधि काजा कैलास ने हाल ही में यूरोपीय संसद में भारत की अहमियत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत, यूरोप की आर्थिक मजबूती के लिए तेजी से एक जरूरी साझेदार बनता जा रहा है। उनके मुताबिक यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार, सुरक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे अहम एजेंडों पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है।
दो बड़े लोकतंत्रों की साझा जिम्मेदारी
भारत में होने वाली इस अहम बैठक से पहले काजा कैलास ने कहा कि ऐसे समय में, जब युद्ध, दबाव और आर्थिक बंटवारे के कारण वैश्विक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, भारत और यूरोपीय संघ का साथ आना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र अब पीछे हटने का जोखिम नहीं उठा सकते।
