Chaos at SIR Centers in Ghaziabad
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में निर्वाचन विभाग द्वारा जारी नोटिस के जवाब के लिए बनाए गए केंद्रों पर भारी भीड़ उमड़ने से अव्यवस्था की स्थिति बन गई। एसआईआर प्रक्रिया के तहत 2003 की वोटर लिस्ट का प्रमाण मांगे जाने के बाद लोगों की परेशानी और बढ़ गई। शहर के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में कुल 14 केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन वहां व्यवस्थाएं नाकाफी नजर आईं।
केंद्रों पर पहुंचे लोगों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौजूदगी न होने के कारण जानकारी नहीं मिल सकी। लोग पुराने मतदाता सूची से संबंधित दस्तावेजों के लिए इधर-उधर भटकते रहे। अचानक 20 साल से अधिक पुराने दस्तावेज मांगे जाने और उचित मार्गदर्शन न मिलने से लोगों में नाराजगी देखी गई।
स्थिति बिगड़ने पर अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लोगों को अलग-अलग कमरों में भेजा। इसके बावजूद कई केंद्रों पर धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बनी रही।
नोटिस का जवाब देने पहुंचे सुनील गुप्ता ने बताया कि उनसे 2003 की वोटर लिस्ट का प्रमाण मांगा गया है, लेकिन केंद्र पर कोई यह बताने वाला नहीं है कि यह सूची कहां से मिलेगी। रचना जैन ने कहा कि प्रशासन को पहले पूरी तैयारी करनी चाहिए थी, खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशान होना पड़ रहा है।
दिन चढ़ने के साथ ही 14ों केंद्रों पर लोगों की संख्या बढ़ती चली गई, जिससे भीड़ को संभालना चुनौती बन गया। केंद्र प्रभारियों ने लंबी कतारों को बांटने के लिए एक ही खिड़की के बजाय कई कमरों में लोगों को शिफ्ट किया।
जिले में बनाए गए 14 केंद्रों पर उन लोगों के दावे और आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं, जिन्हें निर्वाचन विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, इन केंद्रों पर आपसी समन्वय की कमी साफ दिखाई दी। लोगों की मांग है कि 2003 की वोटर लिस्ट को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए या फिर केंद्रों पर इसकी प्रतियां रखी जाएं।
उधर, मोदीनगर में भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए भारी भीड़ देखी गई। बुधवार को 500 से अधिक लोगों ने तहसील पहुंचकर अपने दस्तावेज जमा किए। बताया गया कि तहसील क्षेत्र में करीब 13 हजार ऐसे लोग हैं, जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मैपिंग के समय ये लोग अपने दस्तावेज बीएलओ को उपलब्ध नहीं करा सके थे।
