Bulldozer Action Planned on Centuries-Old Syed Baba Dargah in Etawah, Caretaker Fails to Produce Documents
इटावा में बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी, दस्तावेज नहीं दिखा पाए खादिम
इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित सैकड़ों साल पुरानी बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार पर प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। वन विभाग की जमीन पर बनी इस मजार को अवैध बताते हुए प्रशासन ने वहां नोटिस चस्पा कर दिया है। यह मजार फिशर वन क्षेत्र में स्थित है। मजार के खादिम फजले इलाही से 22 जनवरी तक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन वे कोई कागजात पेश नहीं कर सके।
जवाब देने की तय समयसीमा खत्म होने के बाद प्रशासन ने मजार पर नोटिस चस्पा किया। बताया गया है कि इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची थी, जिसके बाद वन विभाग और जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। प्रशासन का कहना है कि मजार पर बिना अनुमति वर्षों से उर्स का आयोजन होता रहा है और हर गुरुवार यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
आस्था से जुड़ा मामला बता रहे लोग
मजार तक पहुंच को रोकने के लिए रास्ते में गहरे गड्ढे खोदे गए हैं। हालात को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। मजार पर आने वाले लोगों का कहना है कि यह उनकी आस्था पर चोट है और सैकड़ों सालों से यहां लोग आते रहे हैं और उर्स मनाया जाता रहा है।
डीएफओ विकास नायक का बयान
इस मामले में डीएफओ विकास नायक ने बताया कि फिशर वन क्षेत्र वन विभाग की भूमि है। जांच में पाया गया कि मजार वन क्षेत्र के भीतर बनी हुई है। मजार के केयरटेकर को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने और कागजात प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया था। यदि उनके पास कोई वैध दस्तावेज होते तो वे प्रस्तुत कर सकते थे।
शमसुद्दीन से जुड़ा बताया जा रहा है इतिहास
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1194 में इटावा में आक्रमणकारी मोहम्मद गोरी और कन्नौज के राजा जयचंद के सेनापति सुमेर सिंह के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में मोहम्मद गोरी का सेनापति शमसुद्दीन अपने कई सैनिकों के साथ मारा गया था। बताया जाता है कि फिशर वन क्षेत्र में स्थित यह मजार उसी शमसुद्दीन की है।
