After Threatening 500% Tariff on India, Lindsey Graham Changes Tone, Praises Trump Over India–US Trade Deal
वॉशिंगटन। भारत पर कभी 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम अब भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की खुलकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं। ट्रेड डील के तहत भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले को ग्राहम ने ट्रंप का “शानदार कदम” बताया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के ऐलान के बाद ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी अहम है। उनके मुताबिक, यह कदम रूस पर दबाव बनाने की दिशा में कारगर साबित हो सकता है।
ग्राहम ने अपने पोस्ट में लिखा,
“प्रेसिडेंट ट्रंप ने बेहतरीन काम किया है। यूक्रेन युद्ध को खत्म करने को लेकर ट्रंप का संदेश असर दिखा रहा है। इससे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को समर्थन देने वाले देशों को दोबारा सोचने पर मजबूर होना पड़ रहा है।”
रूस पर दबाव बढ़ेगा: ग्राहम
लिंडसे ग्राहम ने आगे कहा कि भारत ने अपने व्यवहार से अमेरिकी टैरिफ में कटौती हासिल की है और उन्हें उम्मीद है कि रूस से तेल खरीदने वाले अन्य बड़े देश भी भारत की राह पर चलेंगे।
उन्होंने कहा,
“पुतिन तभी बातचीत की मेज पर आएंगे, जब उन्हें वास्तविक दबाव महसूस होगा। हम अभी उस मुकाम पर नहीं हैं, लेकिन भारत के कदम से हम उसके करीब जरूर पहुंचे हैं। रूस को यूक्रेन में हो रहे खून-खराबे को खत्म करना होगा।”
पहले भारत पर बेहद सख्त थे ग्राहम
गौरतलब है कि बीते साल भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर तनाव काफी बढ़ गया था। उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था।
लिंडसे ग्राहम ने तब इससे भी आगे बढ़ते हुए भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की वकालत की थी। उन्होंने भारत पर रूस की युद्ध मशीन को समर्थन देने का आरोप लगाया था और यहां तक कहा था कि अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जाएगा।
कौन हैं लिंडसे ग्राहम?
लिंडसे ग्राहम रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता और अमेरिकी सीनेटर हैं। वे पहली बार 2002 में सीनेट के लिए चुने गए थे और 2008, 2014 और 2020 में दोबारा निर्वाचित हुए।
ग्राहम 2019 से 2021 तक अमेरिकी सीनेट की न्यायपालिका समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजनीति में आने से पहले वे अमेरिकी वायुसेना में सेवा दे चुके हैं और वकालत के पेशे से भी जुड़े रहे हैं।
रूस और चीन के खिलाफ सख्त रुख के लिए पहचाने जाने वाले ग्राहम का भारत को लेकर बदला हुआ रुख इस ट्रेड डील के बाद खासा चर्चा में है।
